पुरानी vs नई टैक्स व्यवस्था: 2026 में कौन सी रेजीम आपके लिए बेहतर है?

Written by Finmaster 

मार्च का महीना नजदीक आते ही हर सैलरीड व्यक्ति के मन में एक ही सवाल उठता है - आखिर पुरानी टैक्स रेजीम सही है या नई? यह सवाल 2026 में और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है, क्योंकि सरकार ने बीते कुछ वर्षों में दोनों व्यवस्थाओं में कई बदलाव किए हैं।



मैं आपको एक सच बताता हूँ। इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं है जो सबके लिए सही हो। आपके लिए कौन सी रेजीम बेहतर है, यह पूरी तरह आपकी निवेश की आदतों, आपके द्वारा लिए गए लोन, और आपके खर्चों पर निर्भर करता है।

आज हम इस उलझन को सुलझाएँगे। बिना किसी जटिल भाषा के, सीधे-साधे तरीके से समझेंगे कि 2026 में आपके लिए कौन सी टैक्स रेजीम सही रहेगी।

पहले समझें: पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में मूल अंतर क्या है?

पुरानी टैक्स व्यवस्था वह है जो सालों से चली आ रही है। इसमें टैक्स की दरें थोड़ी ज्यादा हैं, लेकिन आपके पास ढेरों छूट और कटौती के विकल्प हैं। आप सेक्शन 80C (PPF, ELSS, LIC), 80D (हेल्थ इंश्योरेंस), HRA (हाउस रेंट अलाउंस), होम लोन के ब्याज पर छूट - ऐसे कई तरीकों से अपनी टैक्सेबल इनकम घटा सकते हैं।

नई टैक्स व्यवस्था 2020 में आई, और 2023, 2024, 2025 के बजटों में इसे और आकर्षक बनाया गया। 2026 में यह डिफॉल्ट रेजीम है। इसमें टैक्स की दरें काफी कम हैं, लेकिन बदले में आपको ज्यादातर छूट और कटौतियाँ नहीं मिलतीं। कोई 80C, 80D, HRA, होम लोन का ब्याज - कुछ नहीं।

बस एक नजर में फर्क समझ लीजिए:

फीचर पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था (2026)
टैक्स स्लैब ज्यादा दरें कम दरें
80C, 80D, HRA जैसी छूट ✅ मिलती हैं ❌ नहीं मिलतीं
होम लोन ब्याज पर छूट ✅ मिलती है ❌ नहीं मिलती
निवेश की बाध्यता ✅ है (बचत के लिए) ❌ नहीं है
डिफॉल्ट विकल्प नहीं ✅ हाँ

2026 में नई टैक्स व्यवस्था की दरें (कितना टैक्स देना होगा?)

सबसे पहले नई व्यवस्था की दरें समझ लेते हैं, क्योंकि अब यह डिफॉल्ट है:

सालाना आय टैक्स की दर
3 लाख तक कोई टैक्स नहीं
3-6 लाख 5%
6-9 लाख 10%
9-12 लाख 15%
12-15 लाख 20%
15 लाख से ऊपर 30%

इसके अलावा, जहाँ तक मुझे पता है, 7 लाख रुपये तक की आय वालों को नई व्यवस्था में रिबेट मिल जाता है, यानी कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।

2026 में पुरानी टैक्स व्यवस्था की दरें

पुरानी व्यवस्था में टैक्स स्लैब थोड़े अलग हैं और दरें थोड़ी ज्यादा हैं:

सालाना आय टैक्स की दर
2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं
2.5-5 लाख 5%
5-10 लाख 20%
10 लाख से ऊपर 30%

सीनियर सिटीजन (60-80 साल) के लिए 3 लाख तक कोई टैक्स नहीं, और सुपर सीनियर (80+) के लिए 5 लाख तक कोई टैक्स नहीं।

अब असली सवाल: कैसे तय करें कि कौन सी रेजीम आपके लिए बेहतर है?

इसका सीधा सा फॉर्मूला है। आपको यह देखना है कि आप पुरानी व्यवस्था में कितनी छूट (डिडक्शन) ले पाते हैं। अगर आपकी छूट की कुल रकम एक निश्चित सीमा से ज्यादा है, तो पुरानी व्यवस्था फायदेमंद होगी। वरना नई।

स्टेप 1: अपनी कुल छूट का कैलकुलेशन करें

पुरानी व्यवस्था में आप नीचे दिए गए सभी छूटों को जोड़ सकते हैं:

  1. सेक्शन 80C (सबसे आम): 1.5 लाख रुपये तक की छूट। इसमें शामिल हैं:
    • PPF में निवेश
    • ELSS म्यूचुअल फंड
    • LIC का प्रीमियम
    • बच्चों की ट्यूशन फीस
    • होम लोन की मूल राशि का भुगतान
    • टैक्स सेविंग FD (5 साल लॉक-इन)
  2. सेक्शन 80D (हेल्थ इंश्योरेंस):
    • अपने लिए + परिवार के लिए: 25,000 रुपये तक
    • सीनियर सिटीजन के लिए: 50,000 रुपये तक
    • प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप: 5,000 रुपये
  3. HRA (हाउस रेंट अलाउंस): अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और HRA लेते हैं, तो यह एक बड़ी छूट हो सकती है। इसकी गणना थोड़ी जटिल है, लेकिन यह आपकी सैलरी, किराए और शहर पर निर्भर करती है।
  4. होम लोन का ब्याज: सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट। अगर लोन लिया है तो यह बड़ी बचत है।
  5. अन्य छूट:
    • सेक्शन 80E: एजुकेशन लोन का ब्याज
    • सेक्शन 80G: दान
    • सेक्शन 80TTA: बचत खाते का ब्याज (10,000 तक)

अब इन सबको जोड़िए। मान लीजिए आपकी कुल छूट बनती है X रुपये।

स्टेप 2: यह सिंपल फॉर्मूला लगाएँ

अब एक आसान सा काम करिए। अपनी कुल सालाना आय (ग्रॉस सैलरी) में से यह X (कुल छूट) घटाइए।

पुरानी रेजीम में टैक्सेबल इनकम = कुल आय - (80C + 80D + HRA + होम लोन ब्याज + अन्य छूट)

अब इस टैक्सेबल इनकम पर पुरानी दरों से टैक्स कैलकुलेट करें।

स्टेप 3: दोनों की तुलना करें

अब अपनी कुल आय पर नई रेजीम की दरों से टैक्स कैलकुलेट करें (बिना कोई छूट घटाए)। अब देखिए कि किसमें टैक्स कम बन रहा है।

तीन असली उदाहरणों से समझें (2026 के हिसाब से)

उदाहरण 1: राहुल - युवा पेशेवर, निवेश की आदत नहीं
राहुल की सालाना सैलरी 9 लाख है। वह अभी नया है, निवेश नहीं करता, न ही उसने कोई लोन लिया है। वह अपने माता-पिता के साथ रहता है, इसलिए HRA भी नहीं लेता।

· उसकी कुल छूट: 0 (क्योंकि उसने 80C में कुछ निवेश नहीं किया)

नई रेजीम में टैक्स:
9 लाख पर टैक्स (3-6=5%, 6-9=10%) = 15,000 + 30,000 = 45,000 रुपये (लगभग, सेस अलग)

पुरानी रेजीम में टैक्स:
टैक्सेबल इनकम = 9 लाख (कोई छूट नहीं)
पुरानी दरों से टैक्स (2.5-5=5%, 5-10=20%) = 12,500 + 80,000 = 92,500 रुपये

फैसला: राहुल के लिए नई रेजीम ज्यादा बेहतर है। उसे करीब 47,500 रुपये की बचत होगी।
उदाहरण 2: प्रिया - शादीशुदा, निवेश करती हैं, किराए में रहती हैं
प्रिया की सालाना सैलरी 15 लाख है। वह PPF और ELSS में 1.5 लाख निवेश करती हैं। हेल्थ इंश्योरेंस पर 25,000 खर्च करती हैं। वह मुंबई में किराए के मकान में रहती हैं और 3 लाख सालाना HRA लेती हैं (मान लिया)।

· 80C: 1,50,000
· 80D: 25,000
· HRA: 3,00,000
· कुल छूट = 4,75,000

नई रेजीम में टैक्स:
15 लाख पर टैक्स = 15,000 + 30,000 + 45,000 + 60,000 = 1,50,000 रुपये

पुरानी रेजीम में टैक्स:
टैक्सेबल इनकम = 15,00,000 - 4,75,000 = 10,25,000 रुपये
पुरानी दरों से टैक्स = 5% पर 12,500 + 20% पर 1,00,000 + 30% पर 2,500 = 12,500 + 1,00,000 + 750 = 1,13,250 रुपये

फैसला: प्रिया के लिए पुरानी रेजीम बेहतर है। उसे करीब 36,750 रुपये की बचत होगी।
उदाहरण 3: अरुण - होम लोन ले चुके हैं, बच्चों की पढ़ाई का खर्च
अरुण की सैलरी 20 लाख है। उन्होंने होम लोन लिया है, जिसके ब्याज पर 2 लाख की छूट लेते हैं। PPF/ELSS में 1.5 लाख, हेल्थ इंश्योरेंस में 50,000 (सीनियर सिटीजन माता-पिता), बच्चों की ट्यूशन फीस 50,000 (80C में शामिल)।

· 80C: 1,50,000 + 50,000 = 2,00,000? नहीं, 80C की सीमा 1.5 लाख ही है। तो 1,50,000।
· 80D: 50,000
· होम लोन ब्याज (सेक्शन 24): 2,00,000
· कुल छूट = 4,00,000

नई रेजीम में टैक्स:
20 लाख पर टैक्स = 15,000 + 30,000 + 45,000 + 60,000 + 1,50,000 = 3,00,000 रुपये

पुरानी रेजीम में टैक्स:
टैक्सेबल इनकम = 20,00,000 - 4,00,000 = 16,00,000 रुपये
पुरानी दरों से टैक्स = 5% पर 12,500 + 20% पर 1,00,000 + 30% पर 6,00,000 = 12,500 + 1,00,000 + 1,80,000 = 2,92,500 रुपये

फैसला: अरुण के लिए भी पुरानी रेजीम बेहतर है, हालाँकि फर्क ज्यादा नहीं है।

कब पुरानी रेजीम चुनें? कब नई?

पुरानी रेजीम चुनें अगर:

  1. आप निवेश करने के आदी हैं और 80C की 1.5 लाख की सीमा भर लेते हैं।
  2. आप किराए के मकान में रहते हैं और HRA लेते हैं (खासकर महानगरों में)।
  3. आपने होम लोन लिया हुआ है और उसके ब्याज पर छूट लेते हैं।
  4. आप हेल्थ इंश्योरेंस पर अच्छा-खासा प्रीमियम भरते हैं।
  5. आपकी आय ज्यादा है (12-15 लाख से ऊपर) और आपकी छूट भी अच्छी-खासी है।

नई रेजीम चुनें अगर:

  1. आप निवेश नहीं करते या बहुत कम करते हैं।
  2. आप किराए में नहीं रहते (अपना घर है या माता-पिता के साथ)।
  3. आपने कोई लोन नहीं लिया जिस पर ब्याज छूट मिलती हो।
  4. आपकी आय कम है (7-8 लाख तक) - नई रेजीम में रिबेट का फायदा मिलता है।
  5. आप सरलता चाहते हैं - नई रेजीम में कोई निवेश का झंझट नहीं, कोई कागजी कार्रवाई नहीं।

2026 के बजट के बाद क्या बदला है?

2026 के बजट में टैक्स से जुड़े कुछ अहम बदलाव हुए हैं:

  1. नई रेजीम और आकर्षक हुई: सरकार ने नई रेजीम को डिफॉल्ट बनाए रखा है और इसे और सरल बनाया है। अब इसमें टैक्स कैलकुलेशन पहले से ज्यादा आसान है।
  2. छूट की सीमाएँ: पुरानी रेजीम में छूट की सीमाएँ यथावत हैं, लेकिन उद्योग जगत ने एन्युटी और पेंशन उत्पादों पर टैक्स में बराबरी की माँग की है।
  3. डिजिटल पेमेंट पर जोर: सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दे रही है, जिससे छोटे व्यापारियों के लिए टैक्स छूट की सीमा बढ़ सकती है।

सबसे आसान तरीका: ऑनलाइन कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें

अगर आपको खुद कैलकुलेशन में परेशानी हो रही है, तो चिंता न करें। 2026 में कई ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेटर हैं जो आपके लिए यह काम कर देंगे। बस इतना करें:

  • Google पर "Old vs New Tax Regime Calculator 2026" सर्च करें।
  • अपनी आय और निवेश की जानकारी भरें।
  • कैलकुलेटर बता देगा कि किसमें कम टैक्स लग रहा है।

कुछ भरोसेमंद विकल्प: ClearTax, Moneycontrol Tax Calculator, ET Money.

टैक्स प्लानिंग के लिए 5 गोल्डन रूल्स (2026)

  1. साल भर इंतजार न करें: टैक्स प्लानिंग मार्च में नहीं, अप्रैल में शुरू होती है। पूरे साल निवेश फैलाएँ।
  2. सिर्फ टैक्स बचत के चक्कर में बेकार निवेश न करें: 80C के चक्कर में ऐसी स्कीम में पैसा न लगाएँ जो आपको सूट न करती हो। ELSS (म्यूचुअल फंड) में 3 साल का लॉक-इन है, PPF में 15 साल - अपनी जरूरत देखें।
  3. हेल्थ इंश्योरेंस को नजरअंदाज न करें: 80D की छूट भी अच्छी है, और ऊपर से हेल्थ कवर भी मिल जाता है।
  4. HRA का पूरा फायदा उठाएँ: अगर आप किराए में रहते हैं, तो HRA क्लेम करना न भूलें। लैंडलॉर्ड का पैन होना जरूरी है अगर सालाना किराया 1 लाख से ज्यादा है।
  5. दस्तावेज संभालकर रखें: सभी निवेश के प्रमाण, इंश्योरेंस की रसीदें, किराये की रसीदें - सब डिजिटल कॉपी बना लें। ITR भरते समय काम आएगा।

निष्कर्ष: एक ही फॉर्मूला सबके लिए काम नहीं करता

टैक्स प्लानिंग में एक ही राय सबके लिए काम नहीं करती। आपके लिए क्या सही है, यह आपकी निजी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है।

कोई शॉर्टकट नहीं है - आपको बैठकर अपनी आय, अपने निवेश और अपने खर्चों का हिसाब लगाना होगा। लेकिन अच्छी खबर यह है कि एक बार यह कैलकुलेशन कर लेने के बाद, आप हर साल उसी फॉर्मूले को फॉलो कर सकते हैं, जब तक आपकी वित्तीय स्थिति में कोई बड़ा बदलाव न हो।

याद रखिए, टैक्स बचत का मतलब सिर्फ सरकार को कम पैसा देना नहीं है। इसका मतलब है अपने पैसे को समझदारी से मैनेज करना और भविष्य के लिए बचत करना। सही रेजीम चुनकर आप न सिर्फ टैक्स बचा सकते हैं, बल्कि एक बेहतर वित्तीय भविष्य भी बना सकते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या मैं हर साल रेजीम बदल सकता हूँ?

हाँ। सैलरीड व्यक्ति हर साल अपनी रेजीम चुन सकते हैं। नई वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अपने एम्प्लॉयर को बताना होता है कि आप कौन सी रेजीम चुन रहे हैं। बिजनेसमैन अपना ITR भरते समय हर साल चुन सकते हैं।

2. क्या नई रेजीम में 80C की छूट बिल्कुल नहीं मिलती?

बिल्कुल नहीं। नई रेजीम में 80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज - जैसी ज्यादातर छूटें नहीं मिलतीं। सिर्फ कुछ बहुत सीमित छूटें बची हैं, जैसे 80CCD(2) (NPS में एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन)।

3. क्या नई रेजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है?

2026 में नई रेजीम में भी 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। यह एक अच्छी सुविधा है।

4. क्या पेंशनर्स के लिए भी यही नियम हैं?

पेंशनर्स पर भी यही नियम लागू होते हैं। उनकी पेंशन पर भी टैक्स लागू होता है और वे भी दोनों रेजीम में से चुन सकते हैं। सीनियर सिटीजन को पुरानी रेजीम में ज्यादा छूट मिलती है, जैसे 80D में ऊँची सीमा।

5. अगर मैं बिजनेसमैन हूँ तो क्या फर्क है?

बिजनेसमैन के लिए भी यही नियम हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि वे HRA नहीं ले सकते। उनके लिए पुरानी रेजीम तब फायदेमंद होती है जब वे 80C, 80D और अन्य छूटों का पूरा फायदा उठा पाते हैं।

6. क्या टैक्स प्लानिंग के लिए किसी एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए?

अगर आपकी आय साधारण है और सिर्फ सैलरी है, तो आप खुद कैलकुलेटर से काम चला सकते हैं। लेकिन अगर आपके पास कई सोर्स से इनकम है, प्रॉपर्टी है, या बिजनेस है, तो किसी CA (चार्टर्ड अकाउंटेंट) या टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

7. क्या नई रेजीम में कोई छिपा हुआ नुकसान है?

नई रेजीम का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह लंबी अवधि की बचत को हतोत्साहित करती है। पुरानी रेजीम में PPF, LIC, ELSS जैसे निवेश को बढ़ावा मिलता है, जो लंबे समय में आपके लिए फायदेमंद होते हैं। नई रेजीम में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है, इसलिए अनुशासित बचत की कमी हो सकती है।


आधिकारिक स्रोत (Official Sources)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):

यह लेख केवल सामान्य जानकारी एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। यह किसी भी प्रकार की टैक्स सलाह, वित्तीय सलाह, या निवेश की सिफारिश नहीं है।

  1. पेशेवर सलाह लें: कोई भी टैक्स निर्णय लेने से पहले, अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, आय के स्रोत, और निवेश लक्ष्यों के आधार पर एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से स्वतंत्र सलाह अवश्य लें।
  2. स्वयं गणना करें: इस लेख में दिए गए उदाहरण केवल समझाने के लिए हैं। आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों, आय के स्रोतों और लागू नियमों के आधार पर भिन्न हो सकती है।
  3. नियम बदल सकते हैं: टैक्स से जुड़े नियम और दरें सरकार द्वारा समय-समय पर बदली जा सकती हैं। निवेशकों को नवीनतम कानूनी स्थिति की जानकारी रखनी चाहिए।
  4. जिम्मेदारी: इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी, अवधारणा या उदाहरण के आधार पर लिए गए निर्णयों के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी पाठक की स्वयं की होगी। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, आकस्मिक या परिणामी हानि या क्षति के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

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