बच्चे की पढ़ाई का पैसा: SIP, Education Loan या दोनों? (Complete Guide)
सोचिए, आज से पंद्रह साल बाद का दृश्य है। आपका बच्चा, जो अभी साइकिल चलाना सीख रहा है, वह किसी बड़े इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए फॉर्म भर रहा है। आपके चेहरे पर गर्व की मुस्कान है, लेकिन दिल के किसी कोने में एक सिहरन भी है। वो सिहरन है फीस के उस बड़े आंकड़े की, जिसका सामना करने के लिए आपको आज से ही तैयारी शुरू करनी है।
बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए पैसा जुटाना कोई एक दिन का फैसला नहीं है। यह एक लंबी रणनीति है, जो आज की छोटी-छोटी बचत से शुरू होकर, भविष्य के बड़े निवेश तक जाती है। और इस रणनीति में दो बड़े रास्ते हैं – एक SIP (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) का, जो आपकी मेहनत का पैसा जमा करता है, और दूसरा एजुकेशन लोन (Education Loan) का, जो भविष्य की कमाई से आज की फीस भरता है。
सवाल यह है: कौन सा रास्ता चुना जाए? या फिर, क्या दोनों को मिलाकर चलना ज्यादा समझदारी है? चलिए, इन तीनों ही रास्तों को एक-एक करके, बिना किसी जटिल भाषा के, समझते हैं।
रास्ता नंबर 1: SIP – वह अनुशासन जो सपनों को पूरा करता है
SIP का मतलब है नियमित निवेश। हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में डालना। यह रास्ता उनके लिए है जो "तैयारी पर भरोसा" करते हैं।
इसे कैसे शुरू करें?
इसकी शुरुआत बहुत छोटे से हो सकती है। मान लीजिए, आपका बच्चा अभी 5 साल का है और उसकी ग्रेजुएशन में अभी 13 साल हैं। आप हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये की SIP शुरू करते हैं। 12% के सालाना औसत रिटर्न के हिसाब से (पिछले लंबे समय का इतिहास देखें तो यह संभव है), 13 साल बाद यह छोटी-सी रकम बढ़कर लगभग 19 लाख रुपये हो जाएगी। यही है चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंडिंग) का जादू – जहां आपके पैसे पर मिलने वाला ब्याज भी आगे चलकर और पैसा कमाता है।
श्याम और सुनिता ने अपनी बेटी के जन्म पर, उसकी नैपी सेविंग से बचे पैसे बतौर मजाक 1,000 रुपये की एक SIP शुरू की। आज उनकी बेटी 10 साल की है, और वह 1,000 रुपये की वह SIP, अब हर महीने 7,000 रुपये की हो चुकी है। उनका लक्ष्य स्पष्ट है: अगले 8 साल तक यह सिलसिला चलता रहेगा। वे जानते हैं कि समय उनका सबसे बड़ा हथियार है।
- शुरुआत आज से: जितनी जल्दी शुरुआत, उतना बड़ा फंड। 5-10 साल की उम्र आदर्श है।
- बढ़ती SIP: हर साल अपनी सैलरी बढ़ने पर, SIP रकम भी 10% बढ़ा दें। इससे असर दोगुना हो जाता है।
- एसेट एलोकेशन: छोटी उम्र में इक्विटी (शेयर बाजार) में ज्यादा निवेश करें। जैसे-जैसे लक्ष्य का समय नजदीक आए (कॉलेज से 2-3 साल पहले), धीरे-धीरे पैसा कम जोखिम वाले डेट फंड या FD में शिफ्ट करते जाएं।
इस रास्ते की चुनौतियाँ: यह रास्ता अनुशासन मांगता है। बाजार गिरेगा, डर लगेगा, लेकिन SIP जारी रखनी होगी। इसके अलावा, अगर शुरुआत देर से हुई या रकम कम रखी, तो लक्ष्य राशि नहीं मिल पाएगी।
रास्ता नंबर 2: एजुकेशन लोन – वह पुल जो आज की जरूरत को भविष्य से जोड़ता है
एजुकेशन लोन आपातकालीन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक उपकरण है। यह उनके लिए है जो "भविष्य की कमाई पर भरोसा" करते हैं।
इसकी खासियत क्या है?
भारत में एजुकेशन लोन पर टैक्स में छूट (सेक्शन 80ई) मिलती है। इसका मतलब है कि आप जो ब्याज चुकाएंगे, उस पूरी रकम पर आपकी टैक्स में कटौती होगी। यह एक बड़ी राहत है। दूसरी बात, कई लोन कोर्स पूरा होने के 6 महीने से 1 साल बाद तक रिपेमेंट शुरू होती है, जिसे मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) कहते हैं। इस दौरान आपको सिर्फ ब्याज चुकाना होता है।
मान लीजिए, आपके बच्चे को विदेश में 50 लाख रुपये की पढ़ाई करनी है। आपके पास अपनी जमा पूंजी से 15 लाख हैं। आप 35 लाख का लोन लेते हैं। अगले 4 साल की पढ़ाई के दौरान, आप हर साल अपनी बचत से 5-5 लाख डालते रहते हैं, ताकि लोन की रकम और ब्याज कम हो। जब बच्चा नौकरी शुरू करेगा, तब तक लोन की बची हुई रकम पर उसकी EMI भी हल्की होगी।
- अपनी क्रेडिट हेल्थ सुधारें: लोन मिलेगा या नहीं, यह आपके CIBIL स्कोर पर निर्भर करेगा। 750+ स्कोर होना चाहिए। समय पर बिल और EMI भरकर इसे बनाए रखें।
- को-एप्लिकेंट जरूर बनाएं: माता-पिता दोनों को को-एप्लिकेंट बनाने से लोन मिलने की संभावना और रकम बढ़ जाती है।
- कोर्स और कॉलेज रिसर्च करें: बैंक NBA, NAAC, NIRF जैसे संस्थानों से मान्यता प्राप्त कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं। अच्छे इंस्टीट्यूट में एडमिशन से लोन मंजूरी आसान हो जाती है।
इस रास्ते की चुनौतियाँ: इससे आप और आपके बच्चे पर लंबे समय का कर्ज का बोझ आ जाता है। ब्याज चुकाने से आपकी बचत की क्षमता प्रभावित होती है। सबसे बड़ी चिंता: अगर कोर्स के बाद नौकरी न मिली या वेतन कम मिला, तो EMI देना मुश्किल हो सकता है。
रास्ता नंबर 3: हाइब्रिड मॉडल – सबसे समझदारी वाला रास्ता
असल जिंदगी का जवाब अक्सर "या तो/या" में नहीं, बल्कि "और" में छुपा होता है। हाइब्रिड मॉडल यही कहता है: SIP भी और लोन भी। यह रास्ता आपकी बचत को बोझ नहीं बनने देता और लोन को आफत नहीं बनने देता।
यह काम कैसे करता है?
इसका मकसद है लोन की जरूरत को कम से कम करना। आप SIP से एक बड़ा कोर्पस (मुख्य राशि) बनाते हैं। जब पढ़ाई का समय आए, तो आप फीस का एक हिस्सा अपनी SIP की बचत से भरते हैं और बाकी हिस्से के लिए एजुकेशन लोन लेते हैं। इससे लोन की रकम छोटी रहती है, EMI कम होती है, और ब्याज का बोझ कम पड़ता है।
राजेश ने 12 साल पहले अपने बेटे के लिए 7,000 रुपये की SIP शुरू की। आज उनके पास 22 लाख रुपये जमा हैं। उनके बेटे को एक कोर्स में कुल 40 लाख रुपये की जरूरत है। राजेश ने फैसला किया:
· 22 लाख रुपये अपने SIP कोर्पस से दिए。
· सिर्फ 18 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया。
अगर उन्होंने पूरे 40 लाख का लोन लिया होता, तो EMI करीब 50-55 हजार रुपये महीना होती। सिर्फ 18 लाख के लोन की EMI महज 22-25 हजार रुपये महीने की है। यह एकदम मैनेजेबल है, और राजेश की बचत भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
- लक्ष्य तय करें: पहले अनुमान लगाएं कि 10-15 साल बाद पढ़ाई की लागत कितनी होगी (महंगाई को ध्यान में रखकर)।
- दो हिस्से बनाएं: लक्ष्य राशि का 60-70% हिस्सा SIP से जमा करने का लक्ष्य रखें। बाकी 30-40% के लिए लोन का प्लान बनाएं।
- लोन को सप्लीमेंट समझें: अपने दिमाग में यह बैठा लें कि लोन मुख्य फंड नहीं, बल्कि सहायक है। इस सोच से आप SIP पर ज्यादा फोकस करेंगे।
फैसला कैसे करें? आप किस रास्ते के यात्री हैं?
अब सबसे बड़ा सवाल: आपके लिए क्या सही है? इसके लिए खुद से तीन सवाल पूछें:
- "मेरे पास कितना समय है?" अगर बच्चा छोटा है (10 साल से कम) और आप नियमित बचत कर सकते हैं, तो SIP प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर समय कम है, तो हाइब्रिड मॉडल सबसे बढ़िया विकल्प है।
- "मेरी जोखिम उठाने की क्षमता क्या है?" क्या आप लोन के बोझ के साथ रहने में सहज हैं? अगर नहीं, तो SIP पर जोर दें। अगर आपको लगता है कि बच्चे का कोर्स और भविष्य बहुत उज्ज्वल है, तो लोन एक स्मार्ट टूल बन सकता है।
- "मेरा बच्चा क्या सोचता है?" यह सवाल बहुत जरूरी है। क्या आपका बच्चा लोन की जिम्मेदारी समझता है? क्या वह पढ़ाई के बाद नौकरी की जिम्मेदारी लेने को तैयार है? इस पर खुलकर बातचीत करें।
निष्कर्ष: शुरुआत आज से
बच्चे की शिक्षा का फंड बनाना एक सफर है, न कि दौड़। इस सफर में SIP आपकी घिसती-पिटती, पर भरोसेमंद साइकिल है, जो धीरे-धीरे लेकिन पक्के कदम से मंजिल की ओर ले जाती है। एजुकेशन लोन एक एयरपोर्ट का ट्रॉली कार्ट है, जो भारी सामान उठा लेता है, लेकिन उसे चलाने के लिए पैसे देने होते हैं।
सबसे समझदार यात्री वही है जो साइकिल पर चले, लेकिन पास में ट्रॉली कार्ट का किराया भी रखे, ताकि अचानक सामान ज्यादा हो जाए, तो मदद ले सके。
सबसे बड़ी गलती यह सोचना है कि "अभी तो बहुत समय है।" समय सबसे कीमती पूंजी है, जो हाथ से फिसलती चली जाती है। आज, इस पल, एक छोटा सा कदम उठाइए। एक म्यूचुअल फंड कंपनी के ऐप पर जाइए, और सिर्फ 500 रुपये की SIP शुरू कर दीजिए। यह शुरुआत है। कल से आप उस बच्चे के पिता/माँ नहीं, उसके वित्तीय सहयात्री बन जाएंगे, जो उसके सपने को उड़ान देने के लिए, आज ही जमीन से पुश-ऑफ दे रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या एजुकेशन लोन केवल विदेश की पढ़ाई के लिए मिलता है?
नहीं। एजुकेशन लोन भारत और विदेश दोनों में मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ाई के लिए मिलता है, चाहे वह ग्रेजुएशन हो, पोस्ट-ग्रेजुएशन हो या कोई प्रोफेशनल कोर्स। लोन देते समय बैंक कॉलेज की रेप्यूटेशन और कोर्स की संभावनाओं को देखता है।
2. SIP में पैसा कहाँ लगाएँ? इक्विटी या डेट?
यह आपके पास बचे समय पर निर्भर करता है। अगर समय 7-8 साल से ज्यादा है, तो इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स (लार्ज कैप, फ्लेक्सी कैप) में ज्यादा हिस्सा रखें। जैसे-जैसे समय कम हो (3-4 साल रह जाए), पैसा धीरे-धीरे हाइब्रिड या डेट फंड्स में शिफ्ट करते जाएँ। सीधी बात: लंबा समय = ज्यादा जोखिम ले सकते हैं। कम समय = सुरक्षित विकल्प चुनें।
3. अगर मेरी SIP बचत, फीस से कम रह जाए तो क्या करूँ?
इसीलिए हाइब्रिड मॉडल बनाया जाता है। अगर SIP से लक्ष्य का 100% नहीं जुटा पाते, तो बची हुई रकम के लिए एजुकेशन लोन लें। इसके अलावा, आप लोन के साथ एकमुश्त पूर्व भुगतान (प्री-पेमेंट) भी कर सकते हैं। जब भी अतिरिक्त पैसा मिले (बोनस, गिफ्ट, सेविंग), उसे लोन में डाल दें। इससे लोन की अवधि और ब्याज दोनों कम होंगे।
4. क्या माता-पिता ही लोन चुकाएँगे या बच्चे को भी इसमें शामिल करना चाहिए?
यह एक पारिवारिक फैसला है, और इसमें बच्चे को जरूर शामिल करना चाहिए। आदर्श रूप से, लोन बच्चे के नाम पर होता है और माता-पिता को-एप्लिकेंट या गारंटर होते हैं। पढ़ाई के बाद, बच्चे को EMI की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इससे उनमें वित्तीय जिम्मेदारी आती है। शुरू में, आप मदद कर सकते हैं, लेकिन लक्ष्य यही होना चाहिए कि बच्चा अपने पैरों पर खड़ा होकर अपने लोन की जिम्मेदारी ले।
5. क्या गवर्नमेंट स्कीम्स (जैसे सुकन्या समृद्धि योजना) भी इस्तेमाल कर सकते हैं?
बिल्कुल! लड़कियों की शिक्षा के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) एक शानदार, सुरक्षित और टैक्स-फ्री विकल्प है। लड़के-लड़की दोनों के लिए नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) या पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) जैसे सुरक्षित विकल्पों में भी पैसा लगा सकते हैं। बस ध्यान रखें, इनका रिटर्न फिक्स्ड होता है और कम्पाउंडिंग का फायदा मिलता है। इन्हें अपने पोर्टफोलियो का सुरक्षित हिस्सा मानें, जबकि लंबी अवधि के लिए बढ़ोतरी (ग्रोथ) के लिए SIP पर निर्भर रहें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय, कर, या निवेश सलाह नहीं है। कोई भी निवेश या लोन संबंधी निर्णय लेने से पहले, अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, जोखिम सहने की क्षमता और लक्ष्यों के आधार पर, एक सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार (SEBI रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर) से सलाह अवश्य लें।
- निवेश जोखिम के अधीन हैं: म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। SIP पिछले प्रदर्शन को भविष्य के परिणामों का संकेत नहीं माना जा सकता। कृपया सभी संबंधित दस्तावेज (स्कीम इनफार्मेशन डॉक्यूमेंट, फैक्ट शीट आदि) ध्यान से पढ़ें।
- लोन की शर्तें: एजुकेशन लोन की शर्तें, ब्याज दरें और पात्रता अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए भिन्न हो सकती हैं। किसी भी लोन समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तों, ब्याज गणना पद्धति, प्री-पेमेंट नियमों और अन्य शुल्कों को विस्तार से समझ लें।
- आधिकारिक स्रोत: किसी भी सरकारी योजना या बैंकिंग नियम के बारे में जानकारी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और संबंधित बैंकों की आधिकारिक वेबसाइट को प्राथमिक स्रोत मानें।
- व्यक्तिगत जिम्मेदारी: इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर लिए गए निर्णय या की गई कार्रवाई के परिणामों की पूरी जिम्मेदारी पाठक की होगी। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष, आकस्मिक या परिणामी हानि के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।
बच्चे का भविष्य सुनहरा हो, यही कामना है।

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